Sunday, October 20, 2019

aadivasi janjati

"26 नवंबर 2019 को संसद नहीं सुप्रीकोर्ट तय करेगा आदिवासियों की किस्मत क्या है।"
2020 से आदिवासियों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है समान नागरिक संहिता में विशेष दर्जा प्राप्त आदिवासी अपनी पहचान खो देगा ।26 नवंबर 2019 से यह प्रक्रिया आरंभ हो रही है 1927 का वन कानून संशोधन 2019 का प्रारूप तैयार है ,जो आदिवासी के बहुत से संवैधानिक अधिकार को छीन लेगी, यह गेंद सरकार ने सुप्रीमकोर्ट के पाले में  डाल दी है,जिसका निर्णय 26 नवंबर तक हो जाना है जिसमें आपके जल जंगल और जमीन पर से सारे अधिकार सरकार के हाथों वन और राजस्व मंत्रालय के हाथों आ जाना है 26 नवंबर 2019 के पूर्व यदि आदिवासी आंदोलित नहीं हुआ तो 2020 आपके लिए खतरे की घंटी है आखिर 26 नवंबर महत्वपूर्ण क्यों क्योंकि 26 नवंबर को वनाधिकार पर अंतिम सुनवाई है यह सुनवाई 12 सितंबर को क्यों नहीं हो सकी सरकार का वकील सुप्रीम कोर्ट के सामने क्यों खड़ा नहीं हुआ । कारण कि सुप्रीम कोर्ट में आदिवासियों के विरुद्ध निर्णय होने वाला है,यदि सरकार का वकील वहां खड़ा होता  और हारता तो केंद्र की बदनामी होती, इससे आदिवासी नाराज होता, जिससे झारखंड और महाराष्ट्र जहां आदिवासी वोट निर्णायक है यहां पर विधानसभा चुनाव होने हैं आदिवासी नाराज ना हो , इससे पहले इन राज्यों के चुनाव होने दिया जाय  यही कारण है कि चुनाव के बाद 26 नवंबर को निर्णय देने का फैसला किया है। वहां पर चाहे मशीन से या किसी भी माध्यम से सरकार बनाकर वहां की जमीन या पूरे देश में आदिवासियों की वन भूमि को अपने हाथ में ले लेकर,कॉरपोरेट को बेच दिया जाएगा। 
बाद में आंदोलन करने का कोई मतलब नहीं होगा सरकार सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले का वास्ता देकर विरोध करने वालों को कानून का सम्मान नहीं करने के लिए देशद्रोही, या नक्सलवादी करार देकर  गोदी मीडिया के माध्यम से सारे देश की मानसिकता में आपके विरुद्ध जहर घोल देगी ,तब सभी लोग कहेंगे की आदिवासियों की मांग गलत है। इनको विशेष अधिकार क्यों आदि आदि ,आप विलेन हो जाएंगे,इसकी चिंता सबको करना चाहिए,२६ नवंबर २०१९ के पहले जितना दबाव शासन प्रशासन, सुप्रीकोर्ट पर बना सकते है बनाने का प्रयास करे , जगह जगह,आंदोलन,धरना यात्रा प्रदर्शन की तैयारी करें। इसी तारतम्य में मध्यप्रदेश में भी जनांदोलन की तैयारी की जा रही है।सभी आदिवासी समुदाय एवम् संगठन मिलकर इस मुहिम को संबल दे ,यह जिम्मेदारी आम आदिवासी, आदिवासियों के हित में काम करने वाले जनसंगठनों की है।नहीं कर सके तो 2020 से अपने हित में कोई आंदोलन,करने लायक बचेंगे नहीं।(गुलजार सिंह मरकाम राष्ट्रीय संयोजक गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन)

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